Wednesday, May 27, 2015

''रब ने बना दी जोड़ी -हाय राम। ''

अगर आप शादीशुदा है या शादी करने वालीं है और आप शादी के बाद कहीं नौकरी या अपना बिजिनेस शुरू करने का इरादा रखतीं है तो सावधान ! हमारे यहां भिन्न-भिन्न सोच के पति होते है ,पहले उन्हें ठीक से समझ लें फिर आगे क्या और कैसे करना है इसकी योजना बना लें .--
पहला नंबर ऐसे पतियों का जो अपनी पत्नियों की भावनाओं -इच्छाओं का पूरा सम्मान करते है ,और चाहते है की उनकी पत्नी भी आत्मनिर्भर बने ,आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो ..ये रिश्तों में लोगों को बांधते नहीं बल्कि रिश्ते में आज़ादी देना पसंद करते है ..ऐसे विरले ही होते है ..जिसे ये मिल गए बस ,ज़िंदगी संवर गई .
दुसरे नंबर पर ऐसे पति आते है .जो पूरी तरह से अपनी पत्नियों को दबा -ढंका के ,ठोक-पीट के रखते है ...इनकी पत्नियों को कुछ सोचने -समझने ,सलाह-मशविरा देने का अधिकार नहीं होता ..ये सोते हुए सपने भी अपनी पति की पसंद के देखतीं है ..कुछ कमाने- धमाने की बात तो छोड़ ही दीजिये ..इनका इलाज बस एक है -या तो इन्हें छोड़ दीजिये या इनकी सुननी छोड़ दीजिये ..ये खुलेआब बुरे पति कहलाते है ..
तीसरी और अंतिम तरह के पति -ये सबसे ज्यादा खतरनाक होते है ...इनको समझना बड़ा टेढ़ा काम है ..ये दोहरा चरित्र जीते है .अंदर कुछ और बहार कुछ ..ये अपनी पत्नियों की किसी भी इच्छा को पूरा करने का विश्वास दिलाते है ...पर पूरा करते कभी नहीं ..आर्थिक आत्मनिर्भर बनाने का भरोसा दिलाते है ..पर ऍन वक्त पर कोई बहाना बना कर मुकर जाते है ...मुँह से किसी बात को मना नही करते ..पर कैसे किसी की इच्छाओं को दबाना है कैसे इन्हें 'परजीवी' बनाना है ये बखूबी जानते है ....इस तरह की मानसिकता के लोगों से समय रहते . संभल जाना चाहिए ...जो बहुत मुश्किल काम है ..इनकी टरकाने वाली प्रवृत्ति की कारण ..
सो ,समय रहते ..चेत जाएँ . ..नही तो पछतावे के सिवा कुछ हाथ नही लगेगा .

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (29-05-2015) को "जय माँ गंगे ..." {चर्चा अंक- 1990} पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

रचना दीक्षित said...

सार्थक प्रस्तुती